सम-समाज तत्व

Posted By: Tapas Dev Tag: स्वाध्याय Last Update: 16/08/2019
sam-samaaj-tatv-ananda-marga"/

चलना जगत् का धर्म है। सतत् गतिशील रहने के कारण ही पृथ्वी का नाम जगत् पड़ा है। ‘गम्' धातु में “क्विप' प्रत्यय लगाने से “जगत्” शब्द निष्पन्न होता है। जिसका अर्थ है-"चलना जिसका स्वभाव है।" व्यष्टिगत जीवन की तरह सामूहिक जीवन में भी गतिशीलता रहती है। चलने के लिए तीनों चीज़ों का रहना अनिवार्य है।

Read More

सम्यक जीवन

Samayak-Jivan-ananda-marga

मनुष्य को जीवन में, कितने ही नियमों को मानकर चलना होता है ।एक बार इस नियम के संबंध में भगवान बुद्ध से पूछा गया था। इसके उत्तर में उन्होंने आठ प्रकार के नियमों को पालन करने के ऊपर विशेष जोर दिया था । इन 8 नियमों के भीतर एक हुआ 'समय दर्शन'।

Read More

आर्थिक लोकतन्त्र

arthik-loktantra-ananda-marga

आर्थिक लोकतन्त्र आएगी, सबके जीवन में खुशियां लाएगी।। सब के विकास कामंत्र- आर्थिक लोकतंत्र समाज में आर्थिक स्वतंत्रता होनी चाहिए ताकि लोगों को एक पौष्टिक आहार मिल सके। हर किसी को उत्तम स्वास्थ्य का आनंद लेने का अधिकार होना चाहिए।

Read More